Mahashivratri

2024 Mahashivratri Kab Hai?

शुक्रवार, 8 मार्च, 2024 (Friday, March 8, 2024)

महाशिवरात्रि 2024 मुहूर्त
फाल्गुन मास 2024
चतुर्दशी तिथि आरंभ 8 मार्च 2024 9:57 pm
चतुर्दशी तिथि समाप्त 9 मार्च 2024 6:17 pm
महाशिवरात्रि 2024
रात्रि के प्रथम प्रहर की पूजा 6:25pm से 9:28 pm तक ( 8 मार्च 2024)
रात्रि के दूसरे प्रहर की पूजा 9:28 pm (8 मार्च 2024) से 12:31 am तक ( 9 मार्च 2024)
रात्रि के तीसरे प्रहर की पूजा 12:31 am से 3:34 am तक ( 9 मार्च 2024)
रात्रि के चौथे प्रहर की पूजा 3:34am से 6:37 am तक ( 9 मार्च 2024)

क्या है शिवरात्रि और महाशिवरात्रि? (Shivratri and Mahashivratri Difference)

हर हर महादेव दोस्तों। क्या आप जानते है की शिवरात्रि (Shivratri) महाशिवरात्रि (Mahashivratri) क्या है? महाशिवरात्रि 2022 कब है? (2024 Mahashivratri Kab Hai?)

इसका वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व क्या है ? हिन्दू  धर्म ग्रंथों के अनुसार शिवरात्रि वह रात है, जब भगवान् शिव अपने अंदर की हलचल और भौतिकता से परे चले गए थे। उनकी तीसरी आँख खुल गयी थी। इन्हे सदा शिव भी कहा जाता है। जो सदैव रहते है- प्रलय से पहले और प्रलय के बाद भी। इसी दिन पौराणिक कथा के अनुसार सदा शिव और महाशक्ति का मिलन हुआ था। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से जिंदगी हमेशा खुशहाल रहती है।

तो आइये जानते है कि क्यों महाशिवरात्रि (Mahashivratri) को भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है। आप भारत में कहीं भी चले जाइये आपको भगवान् शिव जी का मंदिर अवश्य दिख जाएगा। इन्हे सभी देवों में श्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए इन्हे देवों के देव महादेव भी कहा जाता है। इस ब्लॉग में हम भगवान् शिव से जुड़ी कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे।

ज्यादातर लोगों को भगवान् शिव के दो पुत्रों के बारे में हीं पता होगा भगवान् गणेश और कार्तिकेय लेकिन ये सत्य नहीं है. वास्तव में भगवान् शिव के सात पुत्र है जो इस प्रकार है कार्तिकेय, गणेश, सुकेश, अयप्पा, जालंधर, भौमा और अंधक।

भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है? (Why is Lord Ganesha Worshiped First?)

दोस्तों क्या आप जानते है कि सभी देवों में भगवान् गणेश की पूजा हीं सबसे पहले क्यों की जाती है? तो आइये जानते है इसके पीछे का रहस्य। एक बार महादेव के मन में गणेश जी और कार्तिकेय जी की परीक्षा लेने का विचार आया। उन्होंने दोनों को अपने पास बुलाया और शर्त रखी की दोनों में से जो भी पहले पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर आ जाएगा, उनकी पूजा सबसे पहले होगी। यह सुनते हीं कार्तिकेय जी अपने वाहन मयूर पर सवार होकर प्रतियोगिता के लिए तैयार हो गए और देखते ही देखते कार्तिकेय जी अपने वाहन मयूर पर सवार होकर काफी आगे निकल गए.

गणेश जी अभी सोच ही रहे थे कि उन्हें क्या करना चाहिए। तभी गणेश जी के मन में एक विचार आया की पूरा ब्रह्माण्ड तो महादेव में ही समाया हुआ है। तो क्यो न इनका ही चक्कर लगाया जाय। गणेश जी अपनी सवारी मूषक पर सवार हो कर धीरे-धीरे महादेव की परिक्रमा पूरा कर लेते है। उनके ऐसा करते ही कार्तिकेय जी को अपने आगे गणेश जी की सवारी मूषक के पद चिन्ह दिखाई देने लगते है। कार्तिकेय जी को ये बात समझ नहीं आती है कि ऐसा कैसे हो सकता है। गणेश की सवारी मूषक हमसे आगे कैसे निकल सकता है, जबकि मैंने रास्ते में उसे कही देखा भी नहीं। इसी संशय में कार्तिकेय जी ब्रह्माण्ड की परिक्रमा पूरा कर शिव जी के पास आ जाते है और कहते है की मैंने परिकर्मा पूरी कर ली है।

तब शिव जी कहते है हाँ आपने परिक्रमा पूरी कर ली है, लेकिन गणेश जी आपसे पहले परिक्रमा पूरा कर चुके है। तब महादेव गणेश जी द्वारा लगाए गए परिक्रमा के बारे में बताते है। साथ ही महादेव गणेश जी की इस चतुराई से काफी प्रसन्न हो जाते है। तब शिव जी कहते है की आज के बाद कोई भी पूजा, भगवान् गणेश के बिना स्वीकार नहीं होगी। दोस्तों उसी दिन से कोई भी पूजा और कार्य भगवान् गणेश जी की स्तुति करके ही आरम्भ की जाती है।

अब हम भगवान् कार्तिकेय जी की बारे में जानेंगे (Now We will Learn about Lord Kartikeya)

हिंदू पुराणों के अनुसार माता सती के द्वारा अपने शरीर त्यागने के बाद, महादेव कठोर तपस्या करने लगते है। कुछ दिन बाद पूरे लोक में तारका सुर नामक राक्षस का अत्याचार बढ़ जाता है। सारे देवता उनसे लड़ाई में हार चुके होते है। उसका सामना करना किसी के वश कि बात नहीं होती। सारे देवता अंत में भगवान् ब्रह्मा की शरण में जाते है। उनसे तारका सुर के वध के बारे में पूछते है। तब ब्रह्मा जी कहते है कि इस राक्षस की मृत्यु भगवान् शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकती है। तब सारे देवता भगवान् महादेव की शरण में जाते है। उनसे ब्रह्मा जी द्वारा बताई गयी बात को कहते है। इस प्रकार शिव जी से माता पार्वती की शादी होती है। कालान्तर में कार्तिकेय जी का जन्म होता है और वे तारका सुर का वध कर देते है।

भगवान शिव जी के कितने पुत्र हैं? (How Many Sons does Lord Shiva have?)

इनके दूसरे पुत्र भगवान् गणेश जी है, जिनका जन्म माता पार्वती के शरीर के मैल और उबटन से हुआ है। इनके तीसरे पुत्र का नाम सुकेश है। एक बार की बात है जब भगवान् शिव अपने तीसरे आँख से उत्पन्न तेज को समुन्द्र में फेक देते है तब उससे जालंधर का जन्म होता है। जालंधर भगवान् शिव से ईर्ष्या रखता है। उसे लगने लगता है की वह अपनी शक्ति से पूरे ब्रह्माण्ड पर राज कर सकता है और उसका सामना करने का सामर्थ्य किसी में भी नहीं है। उसमे आसुरी प्रवृति घर कर जाती है। वह अपने जन्म दाता भगवांन शिव को ही परेशान करने लगता है। तब महादेव गुस्से में आकर जालंधर का वध कर देते है। इनके छठे पुत्र का नाम भौम है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान् शिव कठोर तपस्या में लीन थे, तब इनका पसीना धरती पर गिरता है और इससे भौम का जन्म होता है। इनका शरीर रक्त वर्ण का था। इनका पालन-पोषण भूमि के द्वारा ही किया गया। इसीलिए इनका नाम भौम पड़ा। इनके सातवे पुत्र का नाम अंधक है। कहा जाता है कि एक बार माता पार्वती शिव जी का नेत्र अपने हथेली से ढक देती है. तब पुरे ब्रह्माण्ड में अंधकार हो जाता है। तभी महादेव अपना तीसरा  नेत्र खोल देते है। उनके तीसरे नेत्र का तेज इतना होता है कि इससे  माता पार्वती को पसीना आ जाता है। यह पसीना जब धरती पर गिरा उससे एक पुत्र का जन्म हुआ। चुकी उस समय प्रकाश नहीं था इस वजह से वे जन्म से अंधे पैदा हुए। और इसी वजह से उनका नाम अंधक पड़ा।

जब भगवान राम ने की महादेव की पूजा (When Lord Rama Worshiped Mahadev)

दोस्तों हम महादेव जी के बारे में जितना भी लिखे, वह उनके लिए कम ही होगा। ये अपने भक्तों के लिए भोले है तो असुरो के लिए रूद्र। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि अगर ये प्रसन्न हो जाए तो अपने भक्तों को निराश नहीं करते है। ये अपने भक्त की हर मनोकामना पूर्ण करते है। तभी असुर राज रावण भी इनका बहुत बड़ा भक्त था। जब भगवान् राम रावण का वध करने के लिए लंका जाने वाले थे ,तब उन्होंने समुन्द्र के किनारे भगवान् शिव की विधिवत पूजा की थी। यह आज के समय में रामेश्वरम के नाम से प्रसिद्ध है। रामेश्वरम का मतलब होता है वह जो राम के भी ईश्वर है।

दोस्तों शायद आपको पता होगा की महाबली बजरंग बलि भी इन्ही के रूद्र अवतारों में से एक है। इस लिए बजरंग बलि को शंकर सुमन भी कहा जाता है। आइये अब हम आपको महादेव से जुड़ी एक अलग कथा के बारे में बताते है।

कौन था भस्मा सुर राक्षस? (Who was Bhasma Sur Rakshasa?)

भस्मासुर महादेव का बड़ा भक्त था। उसने अपनी तपस्या से महादेव को प्रसन्न कर लिया। तब महादेव ने उससे वर माँगने को कहा। भस्मासुर ने अमरता का वरदान माँगा।  लेकिन उसका यह वरदान सृष्टि के विरुद्ध था। इसीलिए महादेव ने उससे दूसरा वरदान मांगने को कहा। तब भस्मा सुर ने किसी को भी भस्म कर देने का वरदान माँगा। महादेव ने उसे यह वरदान दे दिया। महादेव से वरदान प्राप्त भस्मासुर चारों तरफ कोहराम मचाने लगा। हद तो तब हो गयी जब उसने महादेव को ही भस्म करने की सोच लिया और वह महादेव का पीछा करने लगता है।

वह सोचता है की महादेव को भस्म कर पार्वती का अपहरण कर लेंगे। यह देख कर भगवान् विष्णु कुछ समय के लिए सोच में पड़ जाते है। तभी वे इस समस्या से निपटने का उपाय ढूंढ़ लेते है। वह अपने आप को मोहिनी नामक सुंदरी के रूप में रूपान्तरित कर लेते है और भस्मा सुर के पास जाते है और कहते है की महादेव मुझे हर दिन नृत्य करके दिखाते है अगर आप भी हमें वह नृत्य करके दिखा दे तो मै आपसे विवाह कर लूंगी। यह सुनकर भस्मासुर खुश हो जाता है, लेकिन उसको भगवान् विष्णु की लीला समझ में नहीं आती है। वह नृत्य करना आरम्भ कर देता है और जैसे ही नृत्य करते समय वह अपना हथेली अपने सर पे रखता है तभी वह खुद की भस्म हो जाता है। इस तरह भगवान् विष्णु महादेव के द्वारा दिए गए इस वरदान का समाधान करते है।

भारत के प्रधान मंत्री जी भी शिव जी के भक्त है। (The PM of India Shri Narendra Modi is also a Great Devotee of Lord Shiva)

यदि आज की बात की जाय तो हमारे देश के वर्तमान प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी भगवान् शिव के बहुत बड़े भक्त है। महाशिवरात्रि के दिन देश भर में शिव जी और माता पार्वती का विवाह उत्सव मनाया जाता है। इस दिन आप देश के किसी भी मंदिर में चले जाइये आपको भक्तों का जुलुस दिखाई देगा। मान्यता यह भी है की महाशिवरात्रि के ही दिन देश भर में 12 ज्योतिर्लिंग प्रकट हुए थे। इसी लिए महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का अपना एक अलग ही महत्व है।

इस दिन भक्त सुबह – सुबह स्नान करके भगवान् शिव की पूजा अर्चना करते है। महाशिवरात्रि के दिन माता पार्वती और शिव जी का विवाह करवाना बड़ा ही शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से दाम्पत्य जीवन सुखमय रहता है। अध्यात्म से जुड़े भक्त इस दिन पूरी रात तक जगे रहते है। इस रात अगर आप सजग रह कर अनुभव करेंगे तो आप अपनी ऊर्जा को ऊपर की और उठते हुए महसूस कर सकते है। अगर आप इस रात बिना सोये भगवान् महादेव का भजन करते है तो इससे आपको पूरे साल भर का पुण्य प्राप्त हो जाता है।

दोस्तों आशा करते है की महाशिवरात्रि (Mahashivratri) पर लिखा गया यह ब्लॉग आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह ब्लॉग अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। नए नए ब्लॉग्स पढ़ने के लिए आप विजिट कर सकते हैं। धन्यवाद!

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